अग्नि- वर्षा है तो है ,हाँ !बर्फबारी है तो है
मौसमों के दरमियाँ एक जंग जारी है तो है
जिन्दगी का लम्हा -लम्हा उसपे भारी है तो है
क्रन्तिकारी व्यक्ति ,कुछ हो ,क्रन्तिकारी है तो है
मूर्ति सोने की निरर्थक वस्तु है ,उसके लिए ,
मोम की गुड़िया अगर बच्चे को प्यारी है तो है
खू -पसीना एक करके हम सजाते हैं इसे
हम अगर कह दें कि यह दुनियाँ हमारी है तो है
रात कोठे पर बिताता है कि होटल में कोई
रोशनी में दिन की ,मंदिर का पुजारी है तो है
अपनी कोमल भावना के रक्त में डूबी हुई
मात्र श्रद्धा 'आज भी भारत की नारी है तो है
हैं तो हैं दुनियां से बे परवा परिंदे शाख पर
घात से उनकी कहीं कोई शिकारी है तो है
आप छल - बल के धनी हैं जीतियेगा आप ही
आप से बेहतर मेरी उम्मीदवारी है तो है
देश की सम्पन्नता कितनी बढ़ी है देखिए
सोचिए क्यों ?देश की जनता भिखारी है तो है
दिल्लियों ,अमृतसरों की भीड़ में खोयी हुई ,
देश में अपने कहीं कन्याकुमारी है तो है
एहतराम अपने गज़ल लेखन को कहता है कला
आप कहते हैं उसे जादूनिगारी है ,तो है
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