Monday, 19 September 2011

घूरता कया है कमीने कुत्ते
सुंघता कया है कमीने कुत्ते.

चांदनी ओढ् सो गई बस्ती
जागता कया है कमीने कुत्ते.

शबकी खामोशी सुन सके सुन
भुंकता कया है कमीने कुत्ते.

ये तो तेरी ही अपनी हड्डी है
चातटा कया है कमीने कुत्ते.

गेर अक़स आईने में कहां
नौचता कया है कमीने कुत्ते.

तेरे सायेका तुझ पे पांव पडा
काटता कया है कमीने कुत्ते.

तेरी मंझील हनोझ कोसों दूर
हांपता कया है कमीने कुत्ते.

सामना कर तमाम दुनिया का
भाकता कया है कमीने कुत्ते.

सोचने का कोइ इलाज नहीं
सोचता कया है कमीने कुत्ते.

देख सारी खुदाई जाग उठी
उंघता कया है कमीने कुत्ते.

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