टी0 वी0 से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो बह गए कितने सिकन्दर वक्त के सैलाब में अक्ल इस कच्चे घड़े से कैसे दरिया पार हो सभ्यता ने मौत से डरकर उठाए हैं क़दम ताज़ की कारीगरी या चीन की दीवार हो मेरी खुद्दारी ने अपना सर झुकाया दो जगह वो कोई मजलूम हो या साहिबे किरदार हो एक सपना है जिसे साकार करना है तुम्हें झोपड़ी से राजपथ का रास्ता हमवार हो
Sunday, 9 November 2014
मै बेवफा हु उसने ये तो बता दिया,
मै बेवफा हु उसने ये तो बता दिया,पर मेरी वफाओ का उसने क्या सिला दिया,
वादा करके जिंदगी भर के साथ का,नये दोस्त बना के मुझको भुला दिया,
मुझे काफ़िर बता के गैरों संग मुस्कुराए,गलती हमारी नाखुदा को खुदा बना दिया,
चलो माना मै कभी तेरे काबिल ही नही था,ये जानते हुए भी साथ तुमने सालो बिता दिया,
मै जज्बातो के शतरंज का खिलाड़ी सनम,तुझमे कुछ तो बात थी जो मुझको रुला दिया ....गौरव
तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता
तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता…..
हिम्मत वालो का इरादा अधुरा नहीं होता,
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता..!!
हिम्मत वालो का इरादा अधुरा नहीं होता,
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता..!!
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