Sunday, 9 November 2014

टी0 वी0 से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो

टी0 वी0 से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो बह गए कितने सिकन्दर वक्त के सैलाब में अक्ल इस कच्चे घड़े से कैसे दरिया पार हो सभ्यता ने मौत से डरकर उठाए हैं क़दम ताज़ की कारीगरी या चीन की दीवार हो मेरी खुद्दारी ने अपना सर झुकाया दो जगह वो कोई मजलूम हो या साहिबे किरदार हो एक सपना है जिसे साकार करना है तुम्हें झोपड़ी से राजपथ का रास्ता हमवार हो

मै बेवफा हु उसने ये तो बता दिया,

मै बेवफा हु उसने ये तो बता दिया,पर मेरी वफाओ का उसने क्या सिला दिया,
वादा करके जिंदगी भर के साथ का,नये दोस्त बना के मुझको भुला दिया,
मुझे काफ़िर बता के गैरों संग मुस्कुराए,गलती हमारी नाखुदा को खुदा बना दिया,
चलो माना मै कभी तेरे काबिल ही नही था,ये जानते हुए भी साथ तुमने सालो बिता दिया,
मै जज्बातो के शतरंज का खिलाड़ी सनम,तुझमे कुछ तो बात थी जो मुझको रुला दिया ....गौरव


ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा,

वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता . . . .गौरव




na shakho ne jagah di na hawao ne baqsha,


vo patta awara na banta to kya karta . . . . .gaurav





https://www.facebook.com/gauravwords?fref=photo

तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता

तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता…..
हिम्मत वालो का इरादा अधुरा नहीं होता,
जिस इंसान के कर्म अच्छे होते है
उस के जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता..!!