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Sunday, 18 September 2011



मौसम से हरियाली गायब 
जीवन से खुशहाली गायब 

ईयरफ़ोन हुआ है गहना 
अब कानों से बाली गायब 

ईद खुशी की आये कैसे 
होली गुम दीवाली गायब 

उतरा है आँखों का पानी 
औ चेहरे  की लाली गायब 

अफ़वाहों के  बम जिन्दा हैं  
बातें भोली -भाली गायब 

मीठापन भी ज़हर हुआ है 
वो मिश्री सी गाली गायब 

रातों का सन्नाटा पसरा 
दिन की रुत मतवाली गायब